भारत

Facebook यूजर्स के डेटा प्राइवेसी केस में Meta पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना

SHIDDHANT
22 Oct 2026 11:13 PM IST
Facebook यूजर्स के डेटा प्राइवेसी केस में Meta पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना
x
कंपनी ने फैसले को चुनौती देने का किया ऐलान
दिल्ली। फेसबुक की मूल कंपनी मेटा (Meta) को अमेरिका में डेटा प्राइवेसी से जुड़े एक बड़े मामले में कानूनी झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य की अदालत ने मेटा पर 25 अरब डॉलर का भारी जुर्माना लगाया है। अदालत ने पाया कि कंपनी ने फेसबुक यूजर्स को उनकी निजी जानकारी की सुरक्षा और डेटा के इस्तेमाल को लेकर गुमराह किया था। मेटा ने अदालत के इस फैसले को चुनौती देने की घोषणा की है।
कैम्ब्रिज एनालिटिका विवाद से जुड़ा मामला
यह मामला कैम्ब्रिज एनालिटिका डेटा विवाद से संबंधित है। ब्रिटेन की राजनीतिक सलाहकार कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका पर लगभग 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स की निजी जानकारी बिना उनकी उचित सहमति के हासिल करने के आरोप लगे थे। आरोप था कि इस जानकारी का इस्तेमाल राजनीतिक विज्ञापनों और मतदाताओं को लक्षित करने के लिए किया गया। इसी विवाद के बाद फेसबुक की डेटा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
4.3 करोड़ से ज्यादा उल्लंघन पाए गए
न्यू मैक्सिको की अदालत में सुनवाई के दौरान जूरी ने पाया कि मेटा ने उपभोक्ता संरक्षण कानून का 4.3 करोड़ से अधिक बार उल्लंघन किया था। कंपनी की ओर से डेटा प्राइवेसी और सामग्री नियंत्रण संबंधी 29 बयानों में से 26 को भ्रामक पाया गया। जिला न्यायाधीश फ्रांसिस मैथ्यू ने 21 अक्टूबर 2026 को कंपनी पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। यह अमेरिका में किसी एक राज्य द्वारा कंपनी के खिलाफ हासिल किए गए सबसे बड़े आर्थिक फैसलों में शामिल है।
मेटा ने अदालत के फैसले पर जताई आपत्ति
मेटा ने इस निर्णय से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि राज्य सरकार यह साबित नहीं कर पाई कि उसके बयानों से उपभोक्ताओं को वास्तविक नुकसान हुआ। कंपनी ने उच्च अदालत में अपील करने का फैसला किया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अपील के दौरान जुर्माने की राशि में बदलाव संभव है।
डेटा सुरक्षा को लेकर बढ़ी जवाबदेही
न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने फैसले को बड़ी तकनीकी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश बताया। उनका कहना है कि उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर कंपनियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। इस फैसले ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा, उपयोगकर्ताओं की निजता और कंपनियों की जिम्मेदारियों को लेकर बहस तेज कर दी है।
Next Story